Friday, August 21, 2009

किसी बड़े बदलाव में

मंजिलों की तलाश में लोग जो लहराते माहौल और रास्ते की हलचल आज किसी बड़े बदलाव को बुलावा दे रही है। जिसमे सब स्कूल के उस रजिस्टर के पन्नो की तरह हो जाएगा,जिसमे सिर्फ नाम ही रह जाते हैं। लोग चले जाते हैं अपनी दूरियों को आशियाना समझकर अपनी जिन्दगी में दबे लम्हों को ढूँढ़कर बाहर निकाल कर दिखाते हैं। जिसके बीच कितनी कहानियाँ और यादें उनकी व्यक्तिगत जीवनी को उभार और उत्थान देकर उनकी आँखो से ओझल कर देती है।
    समय जो हर किसी को अपनी जिन्दगी में जीने के लिए वास्तविक्ता को अपनाने और समझने की बुनियाद पर खड़ा
रखता है। जिसमे यह जीवनी कहीखोई सी लगती है। अपनी रोज़मर्रा को लोग इतना भारी कर लेते है कि समय भी उनके उसी रुटिन के हिसाब से चलता है और उन्हें बांधे रखता है। उसी गोल पहिएं में जिसमें एक ही चीज़ दोहराना आदत सी बन जाती है। ऐसे में किसी नई चीज़ का आगम माहौल और रूटिन को बिगाड़ सा देता है।
    यही हो रहा है आज कल बस्ती में समय और रूटिन में किसी अनचाही मौजूदगी को लोग अपनी नहाफ़त (कमज़ोरी) समझ डर-डर कर जी रहे है। जिसमे सर्वे शब्द जो आजकल लोगो की दिनचर्या को मटमैला कर उनको अपना मतलब समझा रहा है।

5 comments:

asha.saxena88@gmail.com said...

yah article ek achcha prayaas .
congratulations for minute observation.
Asha

shama said...

Swagat hai!

kshama said...

Swagat hai!

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिये स्वागत और बधाई । अन्य ब्लागों को भी पढ़ें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देने का कष्ट करें

manoj said...

dhanywad