Friday, August 21, 2009

किसी बड़े बदलाव में

मंजिलों की तलाश में लोग जो लहराते माहौल और रास्ते की हलचल आज किसी बड़े बदलाव को बुलावा दे रही है। जिसमे सब स्कूल के उस रजिस्टर के पन्नो की तरह हो जाएगा,जिसमे सिर्फ नाम ही रह जाते हैं। लोग चले जाते हैं अपनी दूरियों को आशियाना समझकर अपनी जिन्दगी में दबे लम्हों को ढूँढ़कर बाहर निकाल कर दिखाते हैं। जिसके बीच कितनी कहानियाँ और यादें उनकी व्यक्तिगत जीवनी को उभार और उत्थान देकर उनकी आँखो से ओझल कर देती है।
    समय जो हर किसी को अपनी जिन्दगी में जीने के लिए वास्तविक्ता को अपनाने और समझने की बुनियाद पर खड़ा
रखता है। जिसमे यह जीवनी कहीखोई सी लगती है। अपनी रोज़मर्रा को लोग इतना भारी कर लेते है कि समय भी उनके उसी रुटिन के हिसाब से चलता है और उन्हें बांधे रखता है। उसी गोल पहिएं में जिसमें एक ही चीज़ दोहराना आदत सी बन जाती है। ऐसे में किसी नई चीज़ का आगम माहौल और रूटिन को बिगाड़ सा देता है।
    यही हो रहा है आज कल बस्ती में समय और रूटिन में किसी अनचाही मौजूदगी को लोग अपनी नहाफ़त (कमज़ोरी) समझ डर-डर कर जी रहे है। जिसमे सर्वे शब्द जो आजकल लोगो की दिनचर्या को मटमैला कर उनको अपना मतलब समझा रहा है।

Tuesday, August 18, 2009

अजमेरी गेट




अजमेरी गेट जिसका अक्सर नाम सुनने के बाद मन मे एक छवि उभर आती थी। पुराने जमाने का एक बड़ा सा दरवाज़ा जिसके रंग को समय अपने नीचे दबाकर मटमेला कर रहा होगा। बड़ी बड़ी ईट की चौखट जिसकी लाली बदलाब के साथ अपने आप को रंगो मे बदल रही होगी। पुराने जमाने की नंकाशी जो लोगो के हाथ की छुअन से अपना रुप बदल चुकी होगी। उपर की तरफ एक नैम प्लेट जिसके कुछ शब्द टुट चुके होंगे।मगर कुछ शब्दो के टुटने के बाद भी उनकी छोड़ी गई छाप आप से कह रही होगी
"अजमेरी गेट मे आपका स्वागत् है"
अजमेरी गेट जहां की कल्पनिक दुनिया से तो मैंं आप को वाकिफ करा ही चुका हूँ। मगर जो मार्किट उस जगहा में अपना अस्तित्व बनाए वहां रोज़र्मरा मे लोगो को जोड़ती हैं। उस के बारे में हम नही जानते ओर न ही बोलते। क्योंकि यह जगहा अपने में होकर केई चीज़ो को उभारती हे।यह जगहा अपने अन्दर एक बड़े बज़ार को रख कर खो जाने की एक अलग उम्मीद को लेकर जी रही हैं।
अजमेरी गेट एक मोटर मार्केट के साथ केई लोगो के रोज़गारो से जुड़े छोटे बड़े कामो में जुड़ता व जुड़ाता हे। चाहे वो एक गाड़ी वाला हो या दुकान के एक कोने में अपनी पेटी सजाए एक मोची । अजमेरी गेट पर दुकानो की एक लम्बी लाइन जो अपने को दिखाने की कोशीश मे रोज़मर्रा मे जुड़े लोगो को अपनी ओर अमत्रित करती है।
ऐसे बज़ारो में लोगो कि नज़रे कभी हमे बुलाती तो कभी कटने का अहसास भी दिलाती हैं। अजमेरी गेट के रास्ते मे जो गलीया हे उनके नाम ओर उनकी काया को बाहर से समझना ना मुमकिन हैं। क्योकि कुछ गलीया अपने नाम के साथ एक वज़न लिए वहाँ अपना रुआब जमाऐ खड़ी हे। जैसे दो गलीया है एक "बंदुक वाली गली" दुसरी "बल्ले वाली गली" एसी गलीयो के नाम से ही एहसास होता हैं। कि अन्दर क्या होता होगा ?या क्या होता है?